मदीना में हुजूर का इन्तेजार

मदीना में हुजूर का इन्तेजार जब मदीना तय्यिबा के लोगों को यह मालूम हुआ के रासुलुल्लाह मक्का से हिजरत कर के मदीना तशरीफ ला रहे है, तो उन की ख़ुशी की इन्तेह न रही, बच्चे बच्चीयाँ अपने कोठों और छतों पर बैठ कर हुजूर सल. के आने की ख़ुशी में तराने गती थी, रोजाना जवान, बडे बुढे शहर से बहार निकल कर दोपहर तक आप सल. की तशरीफ आवरी का इन्तेजार करते थे, एक दिन वह इन्तेजार कर के वापस हो ही रहे थे, के एक यहुदी की नजर आप सल. पार पडी तो वह फौरन पुकार उठा “लोगो ! जिन का तुम को शिद्द्त से इन्तेजार था वह आगए !
बस फिर क्या था, इस आवाज को सुनते ही सारे शहर में ख़ुशी की लहर दौड गई और पुरा शहर “अल्लाहु अक्बर” के नारों से गुँज उठा और तमाम मुसलमान इस्तिकाबाल के लिये निकल आए, अन्सार हर तरफ से जौक दर जौक आए और मुहब्बत व अकीदत के साथ सलाम अर्ज करते थे, खुश आमदीद कहते थे | तकरीबन पांच सौ अन्सारियों ने हुजूर सल. का इस्तिकबाल किया |

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