हजरत अबूबक्र सिद्दीक

हजरत अबूबक्र सिद्दीक रज. कुरैश के खानदान में पैदा हुए, अबू बक्र आप की कुन्नियत है. नाम अब्दुल्लाह वालिद का नाम उसमान और वालीदा का नाम सलाम था, आप बचपन हि से नेक तबीयत और सादा मिजाज इन्सान थे | जमान-ए-जाहालत में अपने न कभी शराब पी और न कभी बुतों को पूजा |
उम्र मे हुजर सल. से ढाई साल छोटे थे, मगर आप सल. से बडी गहरी दोस्ती और सच्ची मुहब्बत थी, आपने हुजर सल. के अख्लाक व आदत को बहुत करीब से देखा था, जब हुजूर सल ने उन की इस्लाम की दावत दी और अपनी नुबुव्वत का एलान किया, तो मर्दो मे सब से पहले ईमान लाने की सआदत उन को नसीब हुई और हुजूर सल. की नबुव्वत की तस्दीक और जिन्दगी भर जान व माल से साथ देते हुए इस्लाम की तब्लीग में मश्गुल रहे | मक्का की तेरा साला जिन्दगी मे मुश्रीकों की तरफ से पहुँचाई जाने वाली हर किस्म की तकलीफ को बरदाशत करते रहे, अहम मश्वरे और राज की बातें हुजर सल. उन्ही से करते थे | चुनान्चे हिजरत के मौके पर अबू बक्र सिद्दिक रज. ने आप के साथ गारे सौर में तीन दिन कयाम फरर्माया, फिर वहाँ से मदीना मूनव्वरा तशरीफ ले गए, इस्लाम की हिफाजत के लिये हर मौके पर अपना माल खर्च करते रहे और दीन की सर बुलन्दी के लिये पुरी बहादुरी के साथ तमाम गजवात में शिरकत फरर्माते रहे |

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