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हजरत ईसा का आसमान से उतरना Hazrat isa ka aasman se utarna

हजरत ईसा आसमान पर जिन्दा हैं | वह कयामत के करीब दो फरिेश्तों के कन्धों पर सहारा लगाए दिमश्क की जामे मस्जिद के मशरीकी मिनारे पर उतरेंगे, लोग आप को सीढी के जरीये नीचे उतारेंगे, फर्ज की नमाज इमाम मेंहदी के पीछे अदा करेंगे और सलीब को तोड कर शिर्क की जड खत्म कर के ईसाइयों के इस बातील अकीदे की तरदीद करेंगे के ईसा सुली पर चढ कर पुरी कौम के गुनाहों का काफ्फारा बन गए है | उस के बाद खिन्जीर को कत्ल करेंगे | और मुसलमानो का लश्कर लेकर द्ज्जाल को कत्ल करने के लिये निकलेंगे | उस वक्त वह बैतुल मुकददस का मुहासरा किये हुए होगा | वह हजरत ईसा को देखते हि जान बचा कर भागेगा | 

मगर आप उस को बैतुल मुकददस के करीब “बाबे लुद” पर कत्ल कर के पुरी दुनिया मे अद्दल व इन्साफ काइम कर देंगे | जिस की वजह से माल व दौलत की कसरत हो जाएगी, जुल्म व सितम का ऐसा खात्मा हो जाएगा के भेडिया और बकरी एक घाट पर पानी पियेंगे | आप शरीअते मुहम्मदिया के मुताबिक जिन्दगी गुजारेंगे, शादी के बाद औलाद भी होगी तक्रीबन चालीस साल दुनिया में जिन्दा रह कर वफात पाएंगे, इस्लामि अहकाम के मुताबिक तज्हीज व तक्फीन होगी और मदीना मुनव्वरा में हुजूर के पह…

हजरत ईसा का जिन्दा आसमान पर उठाया जाना Hazrat isa ka jinda aasman par uthaya jana

हजरत ईसा का जिन्दा आसमान पर उठाया जानाHazrat isa ka jinda aasman par uthaya jana हजरत ईसा ने बनी इस्राईल की इस्लाह के लिये शहर शहर और गाँव गाँव चल कर अल्लाह के दीन को फैलने की जद्दो जहद शरू की | आप की इस दावत से मुहब्बत व अकीदत में दिन ब दिन इजाफा होने लगा | यहुदी कौम इस दावत व शोहरत को अपने लिये बडा खतरा समझने लगी, इस लिये उन्होंने बादशाहे वक्त को अपना हम खयाल बनाने के लिये हजरत ईसा पर इल्जाम लगाया के यह शख्स तौरत को बदल कर लोगों को बद दीन बनाना चाहता है, तो इस मुशरिक बादशाह ने हजरत मसीह को गिरफ्तार कर के सुली पर चढाणे का हुक्म दे दिया | 
एक मर्तबा आप अपने हवारियों ( यानी अहले ईमान ) के हमरह एक मकान में जमा थे, तो कत्ल के इरादे से यहुदियों ने उस घर का मुहासरा कर लिया सारे हवारी अपनी जान बचा कर भागे और यहुदियों ने अपने एक आदमी को उन्हे कैद करने के लिये अन्दर भेजा, तो अल्लाह तआला ने पहेले ही हजरत ईसा को आसमान पर उठा लिया और अन्दर जाने वाले शास्ख को हजरत ईसा का हम शक्ल बना दिया, यहुदियों ने धोके में अपने ही आदमी को मसीह समझ कर सुली पर चढा दिया |

हजरत ईसा की दावत Hazrat isa ki davt

हजरत ईसा की दावत Hazrat isa ki davt अल्लाह तआला ने हजरत ईसा को बनी इस्राईल की हिदायत और तोहीद की दावत देने के लिये ऐसे माहोल में भेजा के जब उन की मजह्बी हालत नाकाबिले बयान हद तक खराब हो चुकी थी, मुशरिकाना रस्मों को उस कौम ने अपनी जिंन्दगी का जुज बना लिया था, बद अखलाकी व बदमिजाजी, बुग्ज व हसद और रुहानी बिमारीयाँ आम हो चुकी थी, तौरात के अहकाम व अलफाज को अपनी जरुरत और ख्वाहिश के मुताबिक बदल दिया करते थे, 
उन्होंने अपनी बद बख्ती की वजह से हजरत जकरियायहयाको भी शहीद कर डाला था | इन बिगडे हुए हालात में हजरत ईसा ने अपनी कौम को अल्लाह की इबादत करने और उस को अपनी रब मानने और सीधे रस्ते पर चलने की दावत दी और फर्माया के मेरे ऊपर नाजील होने वाली मुकद्दस इन्जील, उस तौरात की तसदीक करती है, जोहजरत मुसा पर नाजील हुई थी | और यह भी फर्माया: मेरे बाद एक नबी आने वाले हैं जिन का नाम आसमानी किताबों मे “अहमद” है, तुम उन को सच्चा और आखरी रसूल मानना और उन पर नाजील होने वाली आखरी किताब कुर्आनकरीमपर ईमान लाना |

हजरत ईसा के हालात Hazrat isa ki Halat

हजरत ईसा के हालात Hazrat isa ki Halat
अगरचे हजरत ईसा की गवाही से बनी इस्राईल के सामने हजरत मरयम की पाक दामनी जाहिर होगई और उन की बदगुमानी दूर हो गई और हजरत ईसा की तरबियात व परवरिश माँ की शफकत में होती रही मगर फिर भी कौम के शरीर लोगों की तरफ से उन की पैदाइश पर बदगुमानी और हजरत जकरिया की मजलूमाना शहादत को हजरत मरयम देख चुकी थीं | 
इस लिये वह कौम और “हैरूद”बादशाह के डर से अपने बेटे हजरत ईसा को लेकर अपने रिश्तेदारों के यहाँ मिस्र चली गई, और बारा साल वहाँ रहने के बाद फिर उन को ले कर बैतुलमक्दिस वापस आगई, इस तरह जब हजरत ईसा की उम्र ३० साल हो गई, तो अल्लाह तआला ने कौम की हिदायत व इसलाह के लिये नुबुव्वत अता फर्मा कर आसमानी किताब “इनजील” नाजील फर्माई | उन्होंने कुफ़्र व शिर्क के खिलाफ अपनी दावत व तौहीद का आगाज किया | हजरत ईसा की शकल व सुरत के बारे में हुजूर ने फर्माया : “मेराज के मौके पर मेरी मुलाकात दुसरे आसमान पर हजरत ईसा से हुई तो मैं ने उन को दर्मियानी कद, सुर्ख रंग, साफ शफ्फाफ बदन और काँधे तक लटकी हुई जुल्फों की हलत में देखा |