रसूलुल्लाह स.की यतीमी Rasulullh S. ki ytimi

                     
हुजूर स. की पैदाइश से पहले ही वालिद माजिद अब्दुल्लाहा का मदीने में इन्तेकाल हो गया था और आप स. यतीमी की हालत में पैदा हुए, जब उम्र मुबारक छ. साल की हुई, तो वालिदा सय्यिदा आमिना आप को लेकर अपने रिश्तेदारों से मिलने मदीना मुनव्वरा चली गई | वापसी में मकामे अबवा में बीमार हुई और वही इन्तेकाल फर्मा गई | 

अब आप स. अपनी महबूब माँ की शफकत व मुहब्बत से भी महरूम हो गए | उस के बाद दादा अब्दुल मुत्तलिब की शफकत में पले बढे | वह आप को दिल व जान से जियादा चाहते थे, किसी वक्त भी आप से गाफिल नही रहते और काबे के साये में अपने साथ बिठाते थे, जब के खानदान में से किसी और को उन के साथ बैठऩे की हिम्मत नही होती थी | मगर दो साल बाद सिर्फ आठ साल की उम्र में आप के दादा अब्दुल मुत्तलिब भी दुनिया से चल बसे इस तरह यतीम मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह के सर से मुशफिक दादा का साया भी उठ गया | गोया अल्लाह तआला ने दुनिया की तरबियत व परवरिश के सारे असबाब को खत्म कर के खुद अपनी खुसूसी रहमत के तहत आप की तरबियत व निगरानी का इन्तेजाम फर्माया |  
                                                                                                       

Comments

Popular posts from this blog

हजरत आदम के दो बेटे

जुलकरनैन

हजरत युसूफ की नुबुव्वत व हुकूमत