हजरत ईसा की पैदाइश Hazrat isa ki paidaish


 हजरत ईसा की पैदाइश Hazrat isa ki paidaish
कुर्आन में अल्लाह तआला ने हजरत ईसा के नामों का जिक्र मुख्तलिफ एतेबार से ५९ मर्तबा किया है | उन की पैदाईश अल्लाह तआला की कुदरत की एक बहुत बडी निशानी है | एक दिन हजरत मरयम किसी जरूरत की वजह से बैतुलमक्दस की मशरिकी जानिब गई हुई थी, के अचानक एक फरिश्ते ने यह खुश्खबरी दी के अल्लाह तआला तुम को एक बेटा अता फर्माएगा जिस का नाम ईसा बिन मरयम होगा | 

हजरत मरयम ने कहा मेरी तो शादी भी नही हुई, लडका कैसे होगा ? फरिश्ते ने कहा : अल्लाह का फैसला ऐसा हि है और यह अल्लाह के लिये आसन है | फिर ऐसा हि हुआ के हजरत ईसा बगैर बाप के पैदा हुए | जब लोगों ने देखा तो बहुत तअज्जूब किया और कहा मरयाम तुम ने यह कितना बडा गुनाह किया है ? हजरत मरयम ने कोई जवाब नही दिया, बल्के बच्चे की तरफ ईशारा कर दिया और बच्चा बोल पडा. “मै अल्लाह का बंद हूँ उसने मुझे किताब दी है और नबी बनाया है, मै जहाँ कही भी राहूँ  खुदा ने मुझे बाबरकत बनाया है और आखरी दम तक अल्लाह ने मुझे नमाज पढने और जकात अदा करने का हुक्म दिया है और अपनी माँ का फर्माबरदार बनाया है ।

मेरी पदाईश  मेरी वफात और फिर दोबारा जिन्दा होना मेरे लिये खैर व बरकत और सलामती का जरिया है |” बच्चे की ऐसी बाते सून कर कौम हैरान रह गई और हजरत मरयम से उन की बदगुमानी अकीदत में बदल गई |          

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