हजरत यूनुस मछली के पेट में | Hazrat Yunus in the belly of a fish.

                            हजरत यूनुस मछली के पेट में | Hazrat                         Yunus in the belly of a fish. 
 हजरत यूनुस अपनी कौम से नाराज हो कर बस्ती से रवाना हो गए और दरियाए फुरात के किनारे पहुँच कर एक कश्ती पर सवार हो गए | 

रास्ते में कश्ती तुफानी मौजों में घिर गई और कश्ती के डूब जाने के आसार दिखाई देने लगे. तो कश्ती वालों ने अपने अकीदे के मुताबिक एक शख्स को दरया में डालने का फैसल किया | उस के लिये कुरआ निकाला गया, तो हजरत यूनुस का नाम निकला, इस तरह तीन मर्तबा कुरआ डाला गया और तीनों मर्तबा हजरत यूनुस का ही नाम निकला | 

तो उन को समुन्दर में डाला दिया गया, उस वक्त एक बडी मछली ने उन को निगल लिया, फिर उन को एहसास हुआ के अल्लाह के हुक्म का इन्तेजार किये बगैर उन का बस्ती से निकल जाना मुनासिब न था, लिहाजा उन्होंने मछली के पेट में ही तौबा व इस्तीगफार शुरू कर दी और कहने लगे : “परवरदिगार ! तेरे सिवा कोई माबुद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ने ही अपने ऊपर जुल्म किया है”, अल्लाह तआला ने हजरत यूनुस की तौबा कबूल की और मछली ने उन को दरिया के किनारे उगल दिया |

 जब वह सेहत याब हो गए, तो फिर बहुकमे खुदावन्दी अपनी कौम के पास गए | कौम उन को देख कर बहुत खुश हुई और उन के हाथ पर इस्लाम कबूल किया |

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