गज्वे-ए-खैबर Gajve-e-khaibar

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खैबर मदीना से शिमाल की जानिब सौ मील की दुरी पर है, यहुदी मदीना से जिला वतन हो कर यहाँ मुसलमानों के खिलाफ साजिश करने लगे, उन्होंने मदीना पर हमले के लिये बनू गितफान और दुसरे कबाइल को मदीना की आधी पैदावार देने के लालच में अपने साथ मिला लिया था, जब रसूलुल्लाह सल. को इस की इत्तेला मिली, तो आप ने सन ७ हिजरी के शुरू में सोला सौ सहाबा को ले कर खैबर की तरफ रवाना हो गए और वह लोग तकरीबन २५ हजार मौजुद थे, तीन रोज बाद एक ऐसे मैदान में पडाव डाला जो खैबर और गितफन के दर्मियान था, आप ने किलों को फतह करना शुरू कर दिया, कमूस नामी किले का सरदार अरब का मशहुर पहलवान मरहब था, 
जो हजार शहासवारों पर भारी समझा जाता था, बीस दिन जंग जारी रहने के बावजुद किला फतह नही हुआ तो आप सल. ने फर्माया : “कल मैं झंडा ऐसे शख्स को दुँगा जिस को अल्लाह और उस के रसूल महबूब रखते हैं और जिस के हाथ पर फतह होगी |” दुसरी रोज आप ने हजरत अली को झंडा दिया | जब हजरत अली लशकर ले कर किले के दरवाजे पर पहुँचे तो मरहब ने हजरत अली को देख कर लडने की दावत दी, तो पहले ही वार में उन्होंने मरहब को कत्ल कर दिया, फिर यहूदियों ने नाकामी का मुंह देख कर खैबर की आधी पैदावार पर हुजूर सल. से सुलह कर ली |              

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