फिरऔन को ईमान की दावत Firaoan ko iman ki davat

                 फिरऔन को ईमान की दावत
 अल्लाह तआला ने हजरत मुसा को नुबुव्वत और मुअजिजात देकर फिरऔन की हिदायत के लिये भेजा, उन्होंने फिरऔन के पास जाकर अल्लाह तआला पर ईमान लाने और बनी इस्राईल पर जुल्म न करने की नसीहत फर्माई |
   फिरऔन और उस की कौम ने उन को झूटलाया, तो अपनी नुबुव्वत की तस्दीक के लिये मुअजिजात पेश फर्माए, मगर फिरऔन ने गुरुर व ताकत के नशे में हजरत मूसा की दावत का असर कबूल करने के बजाए आप के मुअजिजे को जादूगरी का करिश्मा समझ कर मुकाबले के लिये मुल्क के माहिर जादूगारों को बुला लिया, मगर वह जादूगार मुकाबले में नाकाम हो गए, और नुबुव्वत व सहर के फर्क और मुअजिजे की हकीकत को समझ कर जादुगरों ने ईमान कबूल कर लिया | इस मंजर को देख कर फिरऔन गुस्से से भडक उठा और उन को सख्त सजा दे कर हलाक कर डाला | उस के बाद भी हजरत मुसा मुसलसल उन्हें दावत देने में मसरुफ रहे, मगर उन बदबख्तों ने फिर भी ईमान कबूल न किया, जिस की वजह से उन पर कहत साली, तुफान, जूवों, मेंडक और खून के अजाब का सिलसिला शुरू होगया, इन सजाओं से इबरत हासील करने के बजाए उन की सरकशी व नाफर्मानी हद से बढ गई, तो अल्लाह तआला ने पूरी कौम के साथ उस को बहरे कुलजूम में डुबो कर हलाक कर दिया और उस की लाश को महफुज करके बाद में आने वालों के लिये इबरत का निशान बना दिया | 

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