हजरत शुऐब और उन की कौम


               हजरत शुऐब और उन की कौम
हजरत शुऐब अल्लाह के मशहूर नबी है, वह कसरत से नमाज व जिक्र में मश्गुल रहते और अल्लाह तआला के खौफ से खूब रोया करते थे,

कुर्आन मजीद में उन का तजकेरा ११ मर्तबा आया है, उन का नसब हजरत इब्राहीम के बेटे मदयन से मिलता है, जो अपने अहले खाना के साथ हिजाज (अरब) चले गए थे, बढते बढते यह खान्दान कबीले की शक्ल में हिजाज की आखरी सरहदों से मुल्के शाम के करीब तक फैल गया था, अहदे नबवी में शाम, फलस्तीन और मिस्र जाते हुए रास्ते में मदयन के खडंरात नजर आते थे, हजरत शुऐब इसी कबीले में पैदा हुए और बाद में यह कबीला कौमे शुऐब कहलाया | यह कौम बुत परस्ती, मुशरिकाना अकाइद, नाप तौल में कमी, लुट मार और डाका जनी जैसे जराइम में मुब्तला थी | नुबुव्वत मिलने के बाद हजरत शुऐब ने उन लोगों को ईमान व तौहीद की दावत देनी शुरू करदी | उन के वाज व नसीहत और तकरीर व खिताबत से लोगों के दिलों पर बडा असर होता था, इसी लिये हुजूर ने उन को “खतीबुल अम्बिया” के लकब से नवाजा |                                                                                                                         


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