हजरत यूसुफ


                         हजरत यूसुफ 


हजरत यूसुफ बडे मश्हूर और जलीलुलकद्र पैगम्बर है, वह हजरत याकूब के बेटे हजरत इसहाक के पोते और हजरत इब्राहीम के पर पोते है, अल्लाह तआला ने उन की शान में एक मुकम्मल सुरत “सूर-ए-यूसुफ” के नाम से नाजील फर्माई है, जिस में उन की जिन्दगी के हलात व वाकिआत अजीब अन्दाज से बयान फर्माए हैं |     
         
कुर्आने करीम में २७ मर्तबा उन का तजकेरा आया है, उन की पैदाइश हजरत इब्राहीम के तकरीबन दो सौ पचास साल बाद इराक के शहर “फद्दान इरम” में हुई | बचपन ही में वह अपने वालिद के साथ फलस्तीन आगए थे, उन के गयारा भाइयों में बिनयामीन के अलावा बाकी सब सौतेले भाई थे | हजरत याकूब उन से बे हद मुहब्बत करते थे, किसी वक्त भी उन की जुदाई गवारा न थी, क्योंकि शुरू ही से उन की फितरी सलाहियत दुसरे भाइयों के मुकाबले में बिल्कुल मुमताज और रोजे रौशन की तरह जाहिर थी | हजरत याकूब होनहार फरजन्द की पेशानी पर चमकता हुआ नुरे नुबुव्वत पहचानते थे और वहिये इलाही के जरिये उस की इत्तेला पा चुके थे, अल्लाह तआला ने उन्हें नुबुव्वात के साथ हुकूमत व सलतनत से भी नवाजा था |                    

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