हजरत इब्राहीम की कौम की हालत


         हजरत इब्राहीम की कौम की हालत
हजरत इब्राहीम ने जिस खान्दान और माहौल में आँखे खोली, उस में शर्क व बुत परस्ती और जलालत व गुमराही बिल्कुल आम थी | सारे लोग बुतों की पूजा करते और चाँद, सुरज और सितारों को अपनी हाजत व जरुरत पुरी करने का जरिया समझते | हर एक ने अल्लाह तआला की ताकत व कुदरत और वहदानियत को भूल कर बेशुमार चीजों को अपना माबुद बना लिया था | खुद हजरत इब्राहीम के वालीद आजर अपनी कौम के मुख्तलिफ कबीलों के लिये लकडीयों के बूत बनाते और लोगों के हाथों फरोख्त करते थे और फिर लोग उस की पूजा करते थे | यह तक के आजर खुद अपने हथों से बनाए हुए बुतो की इबादत करते और उन से अकीदत व मुहब्बत का इजहार करते थे |  ऐसी जाहलत गुमराही और हक्क व सदाकत से महरूम माहौल में हजरत इब्राहीम ने तौहीद की आवाज लगाई और लोगों को समझाया | मगर किसी ने आप की दावत को तस्लीम नही किया और सख्ती के साथ मुखालफत करने लगे |                                                                                                           

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