हजरत इब्राहीम


                           हजरत इब्राहीम
हजरत इब्राहीम की पैदाइश हजरत इसा से दो हजार साल कब्ल इराक में हुई | वह एक अजीम पैगम्बर और हादी व रहेनुमा थे | कुर्आन में ६९ जगह उन का तजकेरा आया है और मक्की व मदनी दोनों तरह की सुरतों में उन्हें “दीने हनीफ” का दाई, हजरत इस्माईल के वालीदे मोहतरम, अरब के जद्दे अमजद, बैतुल्लाह शरीफ की तामीर करने वाला और अरब कौम का हादी व पैगम्बर बताया गया है | अल्लाह तआला ने उन्हें खास रहमत व बरकत और फजीलत से नवाजा था, उन के बाद आने वाले सारे अम्बिया उन्हीं की नस्ल में पैदा हुए, इसी वजह से वह “अबुल अम्बिया” के लकब से मशहूर हैं | अल्लाह तआला ने नुबुव्वत रिसालत के साथ माल व दौलत भी आता किया था | सखावत व दरिया दिली और मेहमान नवाजी में बहुत मशहूर थे, इस के साथ हि सब्र व तहम्मुल, अल्लाह तआला की जात पर मूकम्मल एतेमाद व भरोसा और लोगों पर शफाकत व मेहरबानी उन की खास सिफत थी |                                                     
                                                                                              

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