हजरत इदरीस


                         हजरत इदरीस
हजरत इदरीस मशहूर नबी हैं, वह हजरत आदम की वफात से तकरीबन सैा साल बाद और हजरत नूह से एक हजार साल पहले शहर बाबुल मे पैदा हुए | 

उन्होंने हजरत शीस से इल्म हासील किया | इल्मे नुजुम, इल्मे हिसाब, सिलाई, नाप तौल, असलिहा साजी और फन्ने तहरीर व किताबत के मुजिद और बानी हजरत इदरीस हैं | उन के जमाने में मुतअद्दद जबानें बोली जाती थी, अल्लाह तआला ने उन को सारी जबानें सिखाई, चुनांचे वह लोगों से उन्ही की जबान में बात चीत किया करते थे | कुर्आने पाक में उन का इस तरह जिक्र किया गया हैं के वह बडे सच्चे और सब्र करने वाले नबी थे | उन को कुर्बे खुदावन्दी का ऊँचा मर्तबा अता किया गया था | मोअर्रिखीन ने आप के अख्लाक का तजकिरा इस तरह किया है के गुफतगु में सन्जीदा, खामोश तबीअत थे, चलते वक्त जमीन पर निगाह रखते और बात करते वक्त शहादत की उंगली से बार बार इशारा फर्माते थे, पुरी जिंन्दगी दावत व तब्लीग में गुजार दी |                          

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