हजरत आदम के दो बेटे


                 हजरत आदम के दो बेटे  

हजरत आदम जन्नत में तन्हा रहेते हुए बेचैनी महसूस करने लगे, तो तसल्ली के लिए अल्लाह तआला ने उन की बाई फसली से हजरत हव्वा को पैदा किया और दोनों को हुक्म दिया के इस दरख्त के अलावा जन्नत की तमाम नेअमतों का इस्तेमाल करो |


शैतान ने वस्वसा डाल कर बहकाया के इस दरख्त की खुसुसियत यह है के इस का फल खाने के बाद तुम हमेशा जन्नत में रहोगे, चुनांचे शैतान के धोके में आकर उन्होने इस दरख्त का फल खा लिया, अल्लाह तआला ने इस गळती की वजह से जन्नत का लिबास उतार कर दोनों को दुनिया में भेज दिया | हजरत आदम अपनी गलती पर बहुत शर्मिंन्दा हुए और एक मुददत तक तौबा व इस्तिगफार करते हुए अल्लाह के सामने रोते रहे, फिर अल्लाह तआला ने उन की तौबा कुबूल फर्माई | उस के बाद दुनिया में हजरत आदम और हव्वा से नस्ले इन्सानी का सिलसिला शुरु हुआ | 
काबिल और हाबील हजरत आदम के दो बेटे थे | दोनों के दर्मियान एक बात को लेकर झगडा हो गया | काबिल ने हाबील को कत्ल कर डाला, जमीन पर यह पहली मौत थी और इस बारे में अभी तक आदम की शरीअत में कोई हुक्म नही मिला था | इस लिये काबिल परेशान था के भाई की लाश को क्या किया जाए | अल्लाह तआला ने एक कव्वे के जरिये उस को दफन करने का तरिका सिखाया | यह देख कर काबिल कहने लगा : हाए अफसोस ! क्या मैं ऐसा गया गुजरा हो गया के इस कव्वे जैसा भी न बन सका | फिर उस ने अपने भाई को दफन कर दिया | यहीं से दफन का तरीका चला आ रहा है |
हुजूर ने काबिल के मूतअल्लिक फर्माया : “दुनिया में जब भी कोई शख्स जुल्मन कत्ल किया जाता है तो उस का गुनाह हजरत आदम के बेटे (काबील) को जरूर मिलता है, इस लिये के वह पहेला शख्स है जिस ने जालिमाना कत्ल की इब्तेदा की और यह नापाक तरीका जारी किया |”
इसी लिये इन्सान को अपनी जिन्दगी में किसी गुनाह की इजाद नही करनी चाहये ताके बाद में  उस गुनाह के करने वालों का वबाल उस के सर न आए |                                                                                     


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